August 27, 2020

मासूमों का शारीरिक शोषण करने वाला कलयुगी चाचा अंतिम सांस तक रहेगा सलाखों के पीछे

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●दो सगी मासूम बहनों से रेप करने पर कलयुगी चाचा अंतिम सांस तक जेल में रहेगा

●जघन्य सनसनी खेज मामले में न्यायाधीश नोरिन निगम ने सुनाया फैसला

छतरपुर। दो सगी मासूम बहनों के साथ दुष्कर्म करने के जघन्य सनसनी खेज मामले में न्यायाधीश नोरिन निगम की अदालत ने फैसला दिया है। कोर्ट ने कलयुगी रिश्तेदार को उसकी अंतिम सांस तक जेल रहने और 25 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है।

एडवोकेट लखन राजपूत ने बताया कि 1 अक्टूबर 2019 को आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने सूचना दी कि दो सगी 12 साल की और 9 साल की नाबालिग बहनों के साथ उनका चाचा शारीरिक शोषण कर रहा है। दोनो बच्चियां घर पर रहना नही चाहती है। बच्चियों की मां का देहांत हो चुका है। बच्चियों की सुरक्षा करना जरुरी है।

सूचना मिलने पर सीडब्ल्यूसी सदस्य मीरा सिंह, पर्यवेक्षक रोशनी पटेल, प्राची सिंह चंदेल प्रशासन ओएससी, अमृता सिंह ने मौके पर जाकर पूंछतांछ की। बच्चियो ने बताया कि उनका चाचा कई सालों से उनके साथ गलत काम कर रहा है। बच्चियों ने बताया कि उन्हें उमेश के चंगुल से बचा लीजिए। वह घर नही जाना चाहती है। उमेश दोनों बालिकाओं को धमकी देता है कि अगर किसी को कुछ बताया तो उमेश उनके भाई को जान से खत्म कर देगा।

महिला टीम दोनो बहिनों को वन स्टाप सेंटर छतरपुर लेकर आई और पंचनामा तैयार किया। एसपी के द्वारा एसआई जनक नंदनी पांडेय को जांच करने के लिए नियुक्त किया। एसआई ने जांच में पाया कि उमेश करीब 6-7 सालों से बच्चियों के साथ मारपीट कर दुराचार करता आ रहा है और यह बात किसी को बताने पर भाई को जान से मारने की धमकी देता है। जांच उपरांत थाना महाराजपुर में उमेश अहिरवार के खिलाफ मामला दर्ज किया और आरोपी उमेश को गिरफ्तार कर निरीक्षक मो. याकूब खान ने विवेचना उपरांत मामले को कोर्ट के सुपुर्द किया।

न्यायालय नोरिन निगम की कोर्ट ने सुनाई सजा
अभियोजन की ओर से पूर्व डीपीओ एसके चतुर्वेदी, डीपीओ प्रवीण कुमार सिंह और अतिरिक्त डीपीओ प्रवेश अहिरवार ने पैरवी करते हुए मामलें के सभी सबूत और गवाहों को कोर्ट के सामने पेश किए और आरोपी को कठोर सजा से दंडित किए जाने की दलील रखी। न्यायाधीश नोरिन निगम की अदालत ने फैसला सुनाया कि आरोपी ने दो अल्पायु कि मासूम बच्चियों के साथ लगातार कई वर्षो तक घृणित अपराध किया है। यह अपराध न केवल अमानवीय है बल्कि न्यायिक विवेक को हिला देने वाला है। निश्चित तौर से ऐसी अवस्यक बच्चियों की सुरक्षा उनके घर के अंदर ही सुरक्षित नही है। ऐसे अपराध समाज में मानव की गरिमा को क्षति पहुंचाते है। हाल ही के वर्षो में अवस्यक बच्चियों के प्रति होने वाले अपराधों में वृद्धि हुई है। ऐसे मामलों में आरोपी को कम सजा देना ना केवल विधायिका के निर्देश के खिलाफ है बल्कि पीड़ित पक्ष के साथ अन्याय भी है। ऐसे मामलों में न्यायालय का यह दायित्व है कि समाज की पुकार को सुनते हुए न्याय की भावना के अनुरुप दोषी व्यक्ति को युक्तियुक्त सजा दी जाए। जहां 12 और 9 साल से कम आयु की अबोध बच्चियों के साथ कई वर्षो तक बलात्कार एवं अप्राकृतिक कृत्य किया गया हो, ऐसे आरोपी स्वभाव से ही विकृत होते है। ऐसे मामलों में उदार दृष्टिकोण अपनाया जाना उचित नही होगा।

कोर्ट ने कलयुगी चाचा उमेश अहिरवार को दोषी ठहाराते हुए उसकी अंतिम सांस तक जेल में रहने और 25 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है।

अवनीश चौबे
(संवाददाता छतरपुर)

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