खाकी की बर्बरता से शर्मसार हुई मानवता! इन्हें किसने दिया आम जनता को खुलेआम पीटने का अधिकार?

बीमारी से लड़ना है, बीमार से नहीं!

इंदौर के बाद अब खंडवा शमर्सार है….

खंडवा। जिले के छैगांवमाखन थाना क्षेत्र के ग्राम बंजारी में एक कोरोना पॉजिटिव परिवार के साथ पुलिस अधिकारियों ने बेरहमी से मारपीट की. जिस परिवार के साथ यह दुर्व्यवहार हुआ, उनके सामने वाले घर की छत से इस अमानवीय घटना के दो वीडियो वहां रहने वाले लोगों द्वारा बनाएं गए और दोनों की सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुए. इसमें ना केवल परिवार को घसीटकर घर से बाहर निकालते हुए बल्कि इसमें पुलिसकर्मी पूरे परिवार को बेरहमी से पीटते हुए भी नजर आएं..

ग्राम बंजारी में इस परिवार के एक 20 वर्षीय युवक ललित पटेल का शुक्रवार को कोरोना सैंपल लिया गया था और उसकी रिर्पोट पॉजिटिव आई. रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर स्वाथ्यकर्मी उसको लेने घर पहुँचे.

ललित की माँ ने जाने से इनकार करते हुए कहा की हम घर में ही क्वारंटाइन रह लेंगे. इस बात पर विवाद होने की वजह से मारपीट होने की स्थिति हो गई, तो स्वास्थ्यकर्मियों ने पुलिस बुला ली.


पुलिस आई और उन्होंने परिवार के सभी सदस्य के साथ मारपीट चालू कर दी. पुलिस ने महिलाओं को भी नहीं छोड़ा. पुलिसकर्मी महिलाओं को भी उस वीडियो में लठ से मारते हुए नजर आए है. आखिर में उस परिवार को सिविल लाइन्स में स्तिथ छात्रावास में क्वारंटाइन किया गया.

इस घटना में स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है की जब उन्होंने परिवार को वहाँ से ले जाने की बात कही तो वे क्रोधित होकर मारपीट करने लगे. डॉक्टर ने आरोपी मानकर श्रीराम, ललित, रानू और लक्ष्मीबाई के विरुद्ध शिकायत दर्ज करवाई है.


वायरल वीडियो को देखकर एसपी ने सीएसपी ललित गठरे को वहाँ भेजा और टीआई गणपत और आरक्षक आकाश को लाइन अटैच कर दिया.

एसपी विवेक सिंह का यह कहना है की परिवारवालों ने पहले स्वाथ्यकार्मियों पर हमला किया था और इस पूरे मामले की जांच फिलहाल जारी है.

इस पर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा:-

प्रदेश के खंडवा ज़िले के बंजारी गाँव का यह विडीओ बताया जा रहा है। एक कोविड पाज़िटिव मरीज़ के परिजनो की किस तरह पुलिस द्वारा बर्बर तरीक़े से पिटाई की जा रही है, महिलाओं पर भी लाठियाँ बरसायी जा रही है ?
शिवराज जी , यह अमानवीयता है , बर्बरता है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घटना को लेकर कहा कि इस तरह महिलाओं को पीटना बहुत बड़ा जुर्म है. इस तरह के दृश्य क्या पहले कभी देखे गए है? इस पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाएगी.

फिलहाल की स्तिथि में काफ़ी लोग एसपी ऑफिस के सामने नारेबाजी कर प्रोटेस्ट कर रहे है. और सरकार से सवाल पूछ रहे है कि इस तरह से कोरोना संक्रमित के परिवार के साथ मारपीट करने का अधिकार पुलिसकर्मियों को किसने दिया?

क्या महिलाओं को पाइप और लाठी से मरना सही था?

क्या पुलिस इस समय में इस तरह से अपना सहयोग दिखा रही है?

अगर ऐसा ही चलता रहा तो क्या आम-जनता खाकी की सम्मान करेगी?

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