September 21, 2020

उज्जैन में भाजपा नेता की धमकी के बाद सीएसपी ऋतु केवरे का हुआ ट्रांसफर

ट्रांसफर: मुख्यमंत्री के उज्जैन दौरे पर रहने के दौरान भाजपा नेता ने की थी थाना प्रभारी से धक्का-मुक्की, सीएसपी को कहा था बदतमीज महिला।।

●भाजपा नेता की धमकी के 24 घंटे के भीतर हुआ सीएसपी का ट्रांसफर.

●ये पहली बार नहीं हुआ है…पिछले तीन एडिशनल एसपी भी नेताओं की दादागिरी के शिकार हुए है.

उज्जैन। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के उज्जैन दौरे के दौरान हेलीपेड पर शुक्रवार सुबह हुए भाजपा नेताओं से विवाद के बाद 24 घंटे के अंदर सीएसपी ऋतु केवरे का ग्वालियर तबादला कर दिया गया है। मध्यप्रदेश शासन के गृह विभाग ने शनिवार शाम सीएसपी केवरे के तबादले का आदेश जारी किया। उन्हें तत्काल प्रभाव से आईजी कार्यालय ग्वालियर भेजा गया है। बता दें इन दो साल के दौरान भाजपा व कांग्रेस नेता वीआईपी की अगवानी के दौरान हुए विवाद के बाद अब तक तीन एएसपी का भी तबादला करवा चुके है।

शनिवार को तबादला आदेश के बाद सीएसपी केवरे ने अपनी सफाई में कहा कि भाजपा नेता संक्रमित पार्षद की पत्नी को सीएम से मिलाने हेलीपेड के अंदर ले जा रहे थे। हमारे वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर मेने उन्हें रोका तो विवाद किया, मुझे अपशब्द कहे व ट्रांसफर की धमकी दी थी। सीएसपी केवरे ने कहा कि नेता सिर्फ तबादला ही करवा सकते है लेकिन कहीं भी भिजवा दे, मैं नौकरी तो दमखम से ही करूंगी।

मैं तो इसी दमदारी के साथ ही नौकरी करूंगी..धन्यवाद उज्जैन-सीएसपी केवरे

मुख्यमंत्री के उज्जैन आगमन के दौरान हेलीपेड पर भाजपा नेताओं के अपशब्दों का शिकार हुई नानाखेड़ा सीएसपी केवरे ने कहा कि फिलहाल तबादला आदेश मुझे नहीं मिला है लेकिन अगर नेताओं ने ग्वालियर तबादला करवा दिया तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। ड्यूटी यहां भी कर रही थी और ड्यूटी वहां भी इसी दमखम से करूंगी। मेरे काम पर इस तबादले का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उज्जैन में अच्छा-बुरा सारे अनुभव मिले, धन्यवाद उज्जैन।

बता दें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के किसानों के खाते में बीमा राशि ट्रांसफर करने के कार्यक्रम को लेकर सीएम शिवराज सिंह चौहान 18 सितंबर को उज्जैन पंहुचे थे. मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए प्रशासन ने स्थानीय भाजपा नेताओं की एक लिस्ट तैयार की थी, लेकिन भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष व पूर्व उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल के साथ बीजेपी का एक पूर्व पार्षद ओम अग्रवाल हेलीपैड पर अंदर जाने की कोशिश कर रहा था। इस बात को लेकर जब पुलिसकर्मियों ने उसे रोकना चाहा तो पूर्व पार्षद पुलिस वालों से भीड़ गया.

आ गई हाथापाई की नौबत

थाना प्रभारी ओर पार्षद दोनों के बीच में आपस में हाथापाई की नौबत तक आ गई थी. मामले को शांत कराने पहुंची सीएसपी रितु केवरे ने जब दोनों पक्षों को समझा कर अलग करना चाहा तो भाजपा के नेता रितु केवरे से उलझ गए और सीएसपी को धमकी देने लगे. मामला इतना बढ़ गया कि भाजपा के आला नेता उन्हें तबादला कराने की लगातार धमकी देते रहे. इस बीच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमरेंद्र सिंह ने मोर्चा संभाला और दोनों पक्षों को अलग किया, जिसके बाद घटना को अभी 48 घंटे भी नहीं बीते थे कि 19 सितंबर की शाम सीएसपी रितू केवरे का ट्रांसफर ग्वालियर कर दिया गया. पूरे घटनाक्रम के बाद आज 18 तारीख को हुए विवाद का वीडियो सामने आ गया.

नेताजी बोले थे सरकार बदल गई, चश्मा भी बदल लो

जब कांग्रेस की प्रदेश में सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ 1 जनवरी 2019 को उज्जैन में महाकाल दर्शन करने आए थे। इस दौरान नृसिंह घाट के समीप अस्थाई हेलीपेड पर प्रवेश को लेकर कांग्रेस नेताओं ने विवाद किया था। यहां तैनात एएसपी नीरज पांडेय को तराना विधायक महेश ने सरेआम यह तक कह दिया था कि सरकार बदल गई है अब अपना चश्मा भी बदल लो। इसके कुछ दिन बाद एएसपी नीरज पांडेय का भोपाल ट्रांसफर हो गया। इस घटना के कुछ दिन बाद दोबारा यहीं स्थिति सर्किट हाउस पर हुई। यहाँ एएसपी अभिजीत रंजन ने नेताओं को रोका तो उन्होंने अपशब्द कहे। तराना विधायक से एएसपी की कहासुनी हो गई जिसके बाद एएसपी रंजन का भी ग्वालियर तबादला हो गया।

दम-खम से ड्यूटी नहीं, यहां तो सिर्फ नेताओं की जी-हुजूरी ही चलती है…

यह राजनीति का चेहरा है। ईमानदारी से ड्यूटी करना भुलाकर जी-हुजूरी यही सिखाती है। न कर सको तो सीएसपी ऋतु केवरे जैसे हाल होते हैं। फिर चाहे आप अपनी जान जोखम में डालकर मुख्यमंत्री की सुरक्षा के लिए ही ऐसा क्यों न कर रहे हों। शुक्रवार से शनिवार तक बीते 24 घंटों में यही हुआ। विवाद का अंत हुआ गुंडागर्दी वाली राजनीति की जीत से। ईमानदारी से डटी सीएसपी ऋतु का गुनाह था कि बिना लिस्ट में नाम वाले छोटे नेताओं को सीएम तक जाने से रोका, संक्रमित पूर्व पार्षद की पत्नी को भी सीएम तक जाने नहीं दिया था, ताकि प्रदेश के मुखिया की सुरक्षा हो सके।

लेकिन यहां ईमानदारी नही चली, नेतागिरी चली। खुलेआम एक महिला अधिकारी को अपशब्द कहे गए। वर्दी में होने के बाद भी एक थाना प्रभारी पर हाथ उठाया गया। पुलिस अफसर को सरेआम ट्रांसफर की धमकी दी गई ओर तमाशा सारे पुलिस विभाग ने देखा। प्रदेश के मुखिया भी नजदीक थे मामला उन तक पहुंचा। उन्होंने आईजी को देखने का कहा, लेकिन शायद फैसला तभी हो चुका था, जब सत्तापक्ष के एक छोटे से नेता के मुंह से ट्रांसफर की बात निकल गई थी।

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