उपचुनाव से पहले कांग्रेस को एक और बड़ा झटका, विधायक राहुल सिंह ने दिया इस्तीफा


क्या टिकाऊ से बिकाऊ हो गए राहुल सिंह


दमोह। उप चुनाव के ठीक पहले कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है । दमोह विधानसभा से विधायक राहुल सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि वह कुछ ही देर बाद भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे।
भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया को काफी कम मतों के अंतर से शिकस्त देने वाले कांग्रेस नेता राहुल सिंह ने अपने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा को आज सुबह भोपाल में सौंपा। जैसे ही यह खबर आम हुई मानो कांग्रेस में सन्नाटा छा गया और कोई भी नेता प्रतिक्रिया देने को तैयार नहीं था। हालांकि सबने यही कहा कि केवल सुना है अभी इसकी पूरी जानकारी नहीं है। मालूम हो कि राहुल सिंह हिंडोरिया के राज परिवार से ताल्लुक रखते हैं।

इन्हीं के बड़े चचेरे भाई प्रदुम्न सिंह लोधी पहले ही कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा ज्वाइन कर चुके हैं। वह बड़ा मलहरा से विधायक थे और फिलहाल बड़ा मलहरा से ही भाजपा के टिकट पर पुनः चुनाव मैदान में अपना भाग्य आजमा रहे हैं। राहुल सिंह के इस्तीफा देने की खबर से कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। माना जा रहा है कि कांग्रेस के लिए यह एक भारी क्षति है । क्योंकि उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति को चुनाव में शिकस्त दी थी जिसे भाजपा के बतौर सेकंड सीएम के रूप में देखा जा रहा था। जयंत मलैया को भाजपा का फाइनेंसियल सपोर्टर माना जाता है । उनकी प्रदेश की राजनीति में काफी गहरी पकड़ है। वह सात बार विधायक रह चुके हैं । आठवीं बार यदि वह चुनाव जीतते तो निश्चित ही प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिलता है । लेकिन राहुल सिंह जैसे नव सीखिए ने उन्हें करारी शिकस्त देकर सारी बाजी पलट दी। इसके पहले राहुल सिंह कभी किसी बड़े पद पर नहीं रहे। वह मात्र जिला पंचायत के सदस्य के रूप में पहली बार निर्वाचित हुए थे । हालांकि यह बात अलग है कि उनके परिवार से ही उन्हें राजनीति सीखने को मिली। भाजपा में राहुल सिंह का क्या भविष्य होगा और उन्हें क्या जगह मिलेगी? यह तो भविष्य ही बताएगा। लेकिन इतना तो तय है कि इससे कांग्रेस को भारी झटका लगा है ।

कांग्रेस एक एक विधायक को जोड़कर जहां सरकार बनाने की जुगत में है वहीं दूसरी ओर लगातार विधायकों के टूटने से पार्टी कमजोर होती नजर आ रही है। यह बात अलग है कि पार्टी के शीर्ष नेता इसे मामूली नफा नुकसान के रूप में देखते हैं। राहुल सिंह के कांग्रेस में रहते हुए चुनाव जीतने और जयंत मलैया के चुनाव हारने को लेकर इस कड़ी को केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल से जोड़कर देखा था। लोगों का यह मानना था कि प्रहलाद पटेल ने भी अंदरूनी तौर पर राहुल सिंह की मदद की है। क्योंकि उनकी वित्त मंत्री जयंत मलैया से काफी लंबे समय से रार चली आ रही है। वह रार अभी भी बनी हुई है । यही कारण है कि चुनाव हारने के बाद मलैया समर्थकों को संगठन में बहुत अच्छे स्थान पर नहीं रखा गया। साथ ही उन्हें तवज्जो भी कम दी जा रही है।

जयंत मलैया भी इस चीज को भली-भांति जानते हैं कि प्रहलाद पटेल के रहते हैं उनके लिए अपने समर्थकों को संगठन में वाजिब स्थान दिलाना आसान नहीं है। हैरानी की बात तो यह है कि जब प्रदुम्न सिंह ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था उस समय राहुल सिंह ने दो टूक लहजे में यही कहा था कि उनकी भाजपा में जाने का सवाल ही नहीं है। वह टिकाऊ नेता है बिकाऊ नहीं। लेकिन आज उन के इस्तीफा के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं क्या वह भी टिकाऊ से बिकाऊ हो गए हैं? जब इस प्रतिनिधि ने कई बार उन्हें स्वयं फोन लगाकर लगाकर बात करने का प्रयास किया तो उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। कांग्रेस के कई बड़े नेता भी उन्हें फोन लगाते रहे ।

कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अजय टंडन ने कहा कि उन्होंने टीवी चैनलों के माध्यम से देखा है। कि राहुल सिंह ने इस्तीफा दे दिया है। वह बात करने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन उनका फोन उठा नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि राहुल सिंह को कांग्रेस में ही अंगद की तरह पैर जमा कर रखना चाहिए थे लेकिन जो कुछ हुआ वह ठीक नहीं है। अब सवाल यह है कि 28 के साथ 29 वी विधानसभा के रूप में दमोह में भी उपचुनाव में क्या राहुल सिंह को टिकट मिलती है? या फिर जयंत मलैया या कोई नया उम्मीदवार यहां से तैयार होगा? फिलहाल कयास यही लगाए जा रहे हैं कि यदि प्रहलाद पटेल राहुल सिंह को ही यदि टिकट दिलवा देते हैं कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। क्योंकि उनके परिवार की केंद्रीय मंत्री पटेल से नज़दीकियां किसी से छिपी नहीं है।
दमोह से शंकर दुबे की रिपोर्ट

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