पीएम मोदी की सफलता असफलता के बीच बढ़ता तनाव

6 साल.. बेमिसाल,
का नारा देने वाली राष्ट्रवादी सत्ताधारी पार्टी भाजपा की मोदी सरकार 2.0 को वर्ष भर हो गया है। पूर्ण बहुमत के साथ लगातार दूसरी बार सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की जोड़ी ने कई कीर्तिमान रचे। जिसमें तीन तलाक से निजाद, कश्मीर समस्या: धारा 370 का हटना, अयोध्या राम मंदिर विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान हुआ।
अंतरराष्ट्रीय सीमा सुरक्षा की दृष्टि से वैश्विक महाशक्तियों से मैत्रीपूर्ण सम्बंधों के साथ, विंग कमांडर अभिनंदन की घर वापसी और पुलवामा आतंकी हमले के जवाब में हुई सर्जिकल स्ट्राइक ने सेना के पराक्रम और जनता में सरकार के प्रति विश्वास को मजबूत किया है।
स्थितियां पहले के जैसी सामान्य होती और कोरोना महामारी की दस्तक ना हुई होती तो आज भारत विश्वपटल पर विकास की नई इबारतें गढ़ रहा होता इसमें कोई संशय नहीं है। लेकिन दुर्भाग्यवश आए इस लाइलाज वैश्विक कोरोना संकट ने मोदी सरकार की समस्याओं को बढ़ाया तो वहीँ इस आपदा के समय कई आंतरिक मामलों के तनाव की रेखाएं भी प्रधानमंत्री मोदी के माथे पर स्पष्ट देखी जा सकती है।

दुश्मनों के नापाक मंसूबों पर पानी फेर दिया
कोरोना विपत्ति के समय दुश्मन देश चीन और पाकिस्तान की मिलीभगत ने देश के लिए नई परेशानियां खड़ी करने की साज़िश रचते हुए सीमा पर तनाव को बढ़ाया है, जिससे बड़ी सूझबूझ से मौजूदा सरकार ने समय रहते भांप लिया और उससे वार्ता करने और जरूरत पड़ने पर मुहतोड़ जवाब देने की भी पर्याप्त तैयारियां कर ली।


दरअसल तनाव की असल जड़ नेपाल सीमा विवाद है।चीन और नेपाल के बीच संतुलन और भारत को लेकर नेपाल के रवैया में आई इस आक्रमकता में नेपाल की राजनीति के अंदरूनी दाव-पेंच की भूमिका अहम रही है। हम इसे नेपाल की कूटनीतिक सफलता और भारत की विफलता के रूप में भी आक सकते है।


भारत और चीन के मध्य सीमा विवाद को लेकर पहले भी तनाव की स्थितियां बनी है। आज से 3 साल पहले 2017 में भी डोकलाम सीमा विवाद को लेकर भी भारत ने अपनी सूझबूझ से सुलह की राह निकाली है और इस बार फिर डोकलाम विवाद सुलझाने वाली प्रधानमंत्री मोदी की विश्वसनीय टीम जनरल विपिन रावत, एनएसए अजीत डोभाल व विदेश मंत्री जयशंकर प्रसाद ने इस स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारियां पूरी कर ली है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में व्हाइट हाउस में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत-चीन सीमा पर बने तनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात होने व इस मुद्दे पर उनका मूड ठीक न होने की बात कहते हुए दोनों देशों में मध्यस्थता को लेकर इच्छा जाहिर की है। लेकिन इस बात के कोई प्रमाण नहीं है कि ट्रंप-मोदी के बीच ऐसी कोई चर्चा हुई हो। बावजूद इसके चीनी विदेश मंत्री ने अमेरिका के इस मध्यस्थता को नकार दिया है। वहीं दूसरी ओर भारत ने आतंक के पनाहगार देश पाकिस्तान की रची पुलवामा-2 करने की नापाक साजिश पर भी पानी फेर दिया है। इस बार भी आतंकियों ने एक कार बम में 40-45 किलो विस्फोटक से सेना के जवानों को निशाना बनाने मंसूबा बनाया था, जिसे भारत ने बड़ी चालाकी से नाकाम कर दिया गया। सीमा सुरक्षा को लेकर सुरक्षा बलों व जांच एजेंसियों की चिंताएं बढ़ गई है और पूरे एहतियात के साथ वे तैयार भी है लेकिन बावजूद इसके संकट स्थायी रूप से टल गया है ये कहना सही नहीं होगा।

10 करोड़ घरों तक वर्चुअल सम्पर्क
एक ओर देश व्यापी लॉक डाउन पहले चरण से बढ़ता हुआ संभावित पांचवे चरण में लागू करने की तैयारी है। इसी बीच सत्ताधारी पार्टी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पूरे देश मे पार्टी की कामयाबियों को घर-घर पहुँचाने के लिए फेसबुक संवाद और जिला इकाइयों के माध्यम से वर्चुअल रैली की तैयारियां कर ली है। इन वर्चुअल रैलियों के माध्यम से भाजपा ने 10 करोड़ घरों तक पहुँचने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वो भी उस स्थिति में जब कोरोना से हुए लॉक डाउन में लाखों मजदूर भुखमरी के कारण मीलों का सफर पैदल तय करके अपने घरों को पहुँचने की जद्दोजहद में दिनरात लगें हुए है। राहत के नाम पर चलाई गई श्रमिक ट्रेनों के रास्ते भटकने और उन ट्रेनों में मजदूरों की मौत होने की दुखद घटना ने एक तबके में सरकार के प्रति असन्तोष बढ़ाया है इसमें वो किसान वर्ग भी है जो आज कोरोना के साथ-साथ टिड्डे दल की दोहरी मार भी झेल रहा है।

इन सब के बीच यदि देश का आम आदमी फिर भी राष्ट्रवाद के नाम पर भाजपा के साथ बना हुआ है तो उसका कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लगी उम्मीदें और गृहमंत्री अमित शाह के साहसी कार्यशैली। लेकिन कुछ बीजेपी नेता अपने भाषणों और करतूतों के चलते उसे ओर मानसिक प्रताड़ना देने में कोई कसर नहीं छोड़ते है इन नेताओं की फेहरिस्त में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण जो राहत पैकेज की घोषणाओं में लोवर व मिडिल क्लास की इनकम 6-18 लाख बताती है, बंगाल बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष जो श्रमिकों की मौत को मामूली बात करार देते है, हिमाचल प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष राजीव बिंदल जो पीपीई कीट घोटाले के चलते निष्काषित होते है, दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी जो नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए क्रिकेट प्रेम जताते है के अलावा कई दूसरे नाम भी है।
जितनी समस्याएं विपक्ष मोदी सरकार के लिए नहीं बढ़ाता है उससे कही ज़्यादा नुकसान इनके अपने नेता ही अपनी पार्टी की छवि बिगाड़ कर देते है। लेकिन इन तमाम स्थितियों के बाद भी प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे देश को सबका साथ,सबका विकास और सबका विश्वास के सूत्र बांधा है और अच्छे दिनों के लिए जनता को आत्मनिर्भर बनाने में सफलता हासिल की है।

कुलदीप नागेश्वर पवार (पत्रकार)
पत्रकारिता भवन इंदौर
8878549537

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