बराबरी या बदलाव! घोड़ी पर होकर सवार दूल्हे के घर बारात लेकर पहुँची दुल्हन

सतना। अभी तक आपने हमेशा दूल्हे की बारात जाते हुए देखा होगा लेकिन सतना जिले में एक चौका देने वाली तस्वीर सामने आई है. जहां दूल्हे की जगह दुल्हन की बारात गाजे-बाजे और धूमधाम के साथ घर से निकाली गई. समाज के अंदर रीति रिवाज के अनुसार आप लोगों ने देखा होगा कि अक्सर घोड़ी पर सवार दूल्हे की बारात बड़े धूमधाम से घरों से निकाली जाती है, लेकिन क्या कभी आपने यह देखा या सुना हैं कि दुल्हन की बारात घोड़ी पर सवार धूमधाम से निकाली गई हो. आपका जवाब ना होगा. लेकिन हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के सतना जिले की जहां शहर के कृष्ण नगर के रहने वाले वलेजा परिवार की इकलौती बेटी, जिसकी बारात घोड़ी में सवार होकर निकली गई है.


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समाज को संदेश देने के लिए निकाली बारात

इस परिवार में 25 सालों में पहली बारात निकाली गई है. नरेश वलेजा की इकलौती बेटी दीपा वालेजा की बारात उनके पूरे परिवार ने बड़े धूमधाम से गाजे बाजे के साथ आतिशबाजी के साथ निकाली. बेटी की बारात निकालने का बस एक मात्र यह उद्देश्य था कि समाज में बेटी-बेटा दोनों एक समान होते हैं. बेटियां किसी से कम नहीं होती है. बेटी दीपा वलेजा को घोड़ी पर बैठा देखकर माता-पिता के साथ-साथ समाज और परिवार के लोगों के अंदर बेहद खुशी नजर आई. इस नई पहल की शुरुआत को लेकर वलेजा समाज के लोग भी उनकी प्रशंसा कर रहे हैं.


बेटियां किसी पर बोझ नही हैं

इस बारे में जब दीपा की मां से बात की गई तो उन्होंने बताया कि बेटा और बेटी दोनों एक समान होते हैं. हमारा सपना था कि हमारे घर में हमारी एकलौती बेटी की बारात घोड़ी पर सवार होकर बड़े धूमधाम से निकाली जाएगी और हमारे परिवार में 25 सालों बाद यह पहली बारात निकाली गई और वह बरात हमारी बेटी की हैं. वहीं इस बारे में जब दुल्हन दीपा से बात की गई तब उन्होंने कहा कि बेटियां बेटों से कम नहीं होती, लेकिन हमारे माता-पिता और परिवार ने मिलकर मुझे एक बड़ा सरप्राइस दिया है. मुझे इस बहुत खुशी है और मैं यह मैसेज देना चाहती हूं कि समाज में बेटी और बेटे का भेदभाव खत्म होना चाहिए और बेटियों को बोझ नहीं समझना चाहिए.

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