कोरोना में परीक्षा : छात्रों के साथ शासन- प्रशासन की भी।

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के साथ शासन प्रशासन की समस्याएं भी लगातार बढ़ती जा रहीं है। लॉक डाउन हुए 60 से ज्यादा दिन बीत चुके हैं लेकिन अब तक इस बीमारी को लेकर कोई समाधान नहीं दिखाई पड़ता और नाहि इससे निपटने की कोई सुव्यवस्थित योजना बनते दिखाई दे रही है। वहीँ आनन-फानन में लिए फैसले लगातार मुश्किलों को बढ़ाते जा रहें है।


वर्तमान स्थिति में देश 8,944 गंभीर मरीजों के साथ दुनिया में दूसरे स्थान पर है

सक्रिय संक्रमित मरीजों की संख्या भारत में 76,490 है जो दुनिया में 5वीं सबसे अधिक है और लगातार इसमें वृद्धि हो रही है। कुल 1,38,661 संक्रमित और 6,781 नए संक्रमित मरीजों के साथ भारत दुनिया का चौथा देश बन चुका है जहां रोज़ सबसे ज्यादा मरीज मिल रहे है। मीडिया में दिखाई जा रही सरकारी आंकड़ों के मुताबिक खबरों में संतुष्टि इस बात पर जताई जा रही है कि इतने फैलाव के बाद भी भारत में मृत्युदर 3% से कम बनी हुई है,लेकिन इसके बावजूद भी इस बात पर ध्यान देना होगा कि संक्रमण से हुई मौत के मामले में भारत 4,137 के आंकड़े के साथ दुनिया में चौथे स्थान पर है।

जारी परीक्षा दिनों में ही अधिक फैलाव की आशंका
स्थिति मध्यप्रदेश में भी कुछ सामान्य नहीं है, यहाँ भी प्रतिदिन 100 के औसत से मरीज बढ़ रहें है। वहीँ लॉक डाउन 4 में दी गई छूट से कई स्थानों पर स्थितियां बिगड़ी है। इसी बीच प्रदेश सरकार ने बोर्ड और विश्वविद्यालयों की परीक्षा को लेकर कमर कस ली है।


मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व राज्यपाल लालजी टंडन ने 29 जून से 31 जुलाई, 2020 के बीच स्नातक और स्नाकोत्तर के अंतिम वर्ष/सेमेस्टर की परीक्षाएं आयोजित करने के निर्देश दिए है। गौर करने वाली बात है कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) और कई अन्य रिसर्च विशषज्ञों ने जून-जुलाई में कोरोना संक्रमण के भारत में चरम पर होने की आशंका जताते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी है। दिल्ली एम्स के विशेषज्ञों ने भी पूर्व में जून के आख़री और जुलाई में मरीजों के बढ़ने की पुष्टि की है। बावजूद उसके इस तरह के लिए फैसले हमारी समस्याओं बढ़ाएंगे नहीं इसकी संभावना कम ही प्रतीत होती है।
प्रदेश सरकार के लिए इस फैसले को छात्रों के स्वस्थ के साथ खिलवाड़ बताते हुए एनएसयूआई इसका विरोध कर रही है और परीक्षाओं को आगे बढ़ाने या जनरल प्रमोशन की मांग कर रही है तो वहीँ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जनरल प्रमोशन का विरोध करते हुए सरकार के साथ सुरक्षा एहतियात के साथ परीक्षा कराने के पक्ष में है। लेकिन इन सब के बीच आये राज्यपाल के निर्देशों पर अंसतोष बढ़ा है क्योंकि 12 वीं बोर्ड की परीक्षा को लेकर पहले से ही मामला गरमाया है।

सीबीएसई ने 5 गुना बढ़ाये परीक्षा केंद्र
मौजूदा हालात में परीक्षाओं को संचालित करने को लेकर विशेष तैयारियां करना महत्वपूर्ण है। इसी लिहाज़ से सीबीएसई ने 10वीं 12वीं की परीक्षा के लिए परीक्षा केंद्रों में 5 गुना वृद्धि की है। 3000 परीक्षा केंद्रों की बजाय इस बार 15000 परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था की जायेगी। केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की माने तो ऐसा इसलिए किया गया है ताकि परीक्षा केंद्रों पर सोशल डिस्टेंसिंग बने रहे व संक्रमण का खतरा कम हो सके।
लेकिन अगर मध्यप्रदेश सरकार भी जारी निर्देशों के आधार पर परीक्षा संचालित कराती है तो उसे भी सुरक्षा एहतियात के लिए विशेष कदम उठाने होंगे। क्योंकि 12वीं बोर्ड के अलावा विश्वविद्यालयों में अंतिम वर्ष/सेमेस्टर की परीक्षा भी कराना इन दिनों प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर मालूम पड़ती है।
क्योंकि सामान्य दिनों में जहां प्रशासन परीक्षा केंद्रों में पस्त नज़र आता है वो इन दबाव के दिनों में कितना निखर कर सुव्यवस्थित परिणाम देगा ये विचारणीय है।

बड़ी चुनौती ये भी है कि महाविद्यालय स्तर पर सुरक्षा एहतियात को लेकर कितनी जागरूकता रहेंगी और जिम्मेदार इसका कितनी ईमानदारी से पालन कराएंगे ?
एक छोटी सी चूक भी हुई तो उसका खामियाजा बड़ा भुगतान पड़ सकता है। ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों को यातायात व्यवस्था बन्द होने की स्थिति में कई समस्याओं का सामान तो करना होगा ही वहीँ अगर परीक्षा ऑनलाइन कर दी जाती है तो समस्या कुछ हद तक तो कम होगी ही लेकिन इस स्थिति में भी नुकसान ग्रामीण या सुविधाओं के अभाव में पड़ रहें छात्रों का ही होगा।

बेहतर रहेगा यदि शासन हड़बड़ी की बजाय उचित सुरक्षा गाइडलाइंस बनाकर विश्वविद्यालय प्रशासन को मौजूदा विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर परीक्षा सामग्री व सुरक्षा की पुख्ता इंतजाम करने का पर्याप्त समय दे और फिर इन प्रक्रिया को सुचारू रूप से शुरू करें। इस बीच इन दिनों में विशेषज्ञों की आशंका को भी जहन में बनाये रखते हुए स्वास्थ्य विभाग को भी हाई अलर्ट जारी करें ताकि अनहोनी की स्थिति में हम आसानी से संभल सकें। प्रत्येक परीक्षा केंद्रों पर मास्क,दस्ताने,सैनिटाइजर और सैनिटाइजर टनल/द्वार की प्रमुखता से व्यवस्था की जाये।
यथासम्भव थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था को भी उपयोग में लाया जाये। इस मुश्किल घड़ी में जरूरी नहीं कि सभी संकाय के विद्यार्थियों का टाइम टेबल एक साथ रखें संसाधनों व सुरक्षा की दृष्टि से खण्ड-खण्ड में भी परीक्षा संभव कराई जा सकती है या नहीं इस पर एक बार पुनः विचार किया जा सकता है।

कुलदीप नागेश्वर पंवार
पत्रकारिता भवन इंदौर
8878549537

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