April 2, 2021

आगर: दलित युवक की मौत के बाद नलखेडा थाने में हुआ जमकर हंगामा, थाने के गेट पर हथकड़ी लगाकर “खाकी” ने खुद को किया कैद

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आगर-मालवा। नलखेड़ा निवासी दलित समाज के एक युवक की कथित तौर पर सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद उपचार के दौरान हुई मौत के मामले में मृतक के परिजनों द्वारा हत्या की आशंका दर्शाते हुए युवक का शव नलखेड़ा थाना परिसर में रखकर प्रदर्शन किया है. परिजनों के साथ सैकड़ों की संख्या में दलित समाज के अन्य लोगों द्वारा थाने का घेराव किया गया वहीं पुलिस ने थाने का चैनल गेट लगाकर खुद को अंदर बंद कर लिया.

प्रदर्शन कर रहे परिजनों व समाजजनों की मांग है की नलखेड़ा पुलिस इस मामले में हत्या का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू करें. वही हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश करते हुए मृतक के परिजनों से बातचीत कर रहे है.

●क्या है पूरा मामला?

बता दे कि 25 मार्च को नलखेड़ा निवासी अर्जुन पिता रामचंद्र मालवीय ग्राम भैंसोदा के समीप घायल अवस्था में पड़ा हुआ था. तब राहगीरों की सूचना पर पुलिस व अर्जुन के परिजन मौके पर पहुंचे थे और घायल अर्जुन को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नलखेड़ा पहुंचाया गया था. जहां से गंभीर अवस्था में उसे इंदौर रेफर कर दिया गया था. तब नलखेड़ा पुलिस ने इस मामले को सड़क दुर्घटना मानते हुए प्रकरण की जांच शुरू की थी. वही इंदौर में उपचार के दौरान शुक्रवार को अर्जुन की मौत हो गई.

●परिजनों ने दबंगो पर लगाया हत्या का आरोप

इस मामले में परिजनों का आरोप है कि अर्जुन जिस दो-पहिया वाहन पर बैठा था, उस वाहन पर किसी प्रकार की खरोंच तक नहीं आई, जबकि अर्जुन बुरी तरह से घायल था. परिजनों का आरोप है कि भैंसोदा निवासी दबंग समाज के लोगों द्वारा मारपीट की गई है, जिस कारण अर्जुन घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई.

पुलिस अभी तक इस मामले को सड़क दुर्घटना मानकर जांच कर रही थी लेकिन शुक्रवार को अर्जुन के परिजन इंदौर से उसका शव लेकर सीधे नलखेड़ा थाने पर पहुंच गए और अर्जुन की मौत के मामले को हत्या बताते हुए प्रकरण दर्ज करने की मांग पर अड़े रहे. जब पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की तो सैकड़ों की संख्या में दलित समाज के लोग थाने पहुंच गए और थाने का घेराव करते हुए नारेबाजी करने लगे. जानकारी लगने पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नवल सिंह सिसोदिया और नाहरसिंह रावत द्वारा मृतकों के परिजनों और समाज के जवाबदारों से थाने के भीतर चर्चा की जा रही है.

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विजय बागड़ी

Indian Journalist, Editor-in-chief of thetelegram.in
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