आजादी के 74 साल बाद गाँव में पहली बार दलित युवक अलखराम की घोड़ी पर निकलेगी निकासी, समर्थन में आई चंद्रशेखर की भीम आर्मी

उत्तरप्रदेश। आजादी के 74 साल बाद भी देश के कई हिस्सों में दलित समाज के युवकों को शादी के समय घोड़ी पर बैठकर निकासी निकालने नही दी जाती है. उन्हें दबंगो द्वारा ऐसा करने पर धमकाया जाता है. उत्तरप्रदेश के माधवगंज में अनुसू्चित जाति के दूल्हे अलखराम की घोड़ी चढ़ने की तमन्ना पूरी कराने में जनप्रतिनिधि और भीम आर्मी के युवा भी समर्थन में उतर आए हैं.

अलखराम की 18 जून को शादी होना है. उसने घोड़ी पर चढ़कर शादी की रस्में पूरी कराने में प्रशासन से सहयोग मांगा था. इसका मैसेज भी सोशल मीडिया पर वायरल किया. जिसके बाद BHIM ARMY के जिलाध्यक्ष आकाश सहित स्थानीय लोगों ने अलखराम की इच्छा पूरी करने में सहयोग देने का भरोसा दिया है. प्रशासन ने भी शादी के दिन सुरक्षा मुहैया कराने को कहा है.

भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद रावण ने पिछले दिनों राजस्थान में भी एक दलित युवक को घोड़ी पर बिठाकर जुलूस निकलवाया था, जिसके बाद अब चंद्रशेखर आजाद रावण हर उस दलित युवक के लिए एक उम्मीद बन गए हैं जो घोड़ी पर बैठना तो चाहता है लेकिन उसके गांव में उसे घोड़ी पर बैठने नहीं दिया जाता. ऐसे में अलखराम के सपोर्ट में भी भीम आर्मी उतर आई और ट्विटर पर अब #घोड़ी_चढ़ेगा_अलखराम ट्रेंड करने लगा है..

मध्यप्रदेश भीम आर्मी के नेता सुनील अस्तेय ने ट्विटर पर लिखा: आज़ादी के 73 सालों बाद, तुमने सोंच भी कैसे लिया कि हम घोड़ी पर नही बैठ सकते, सुनो रे, अलखराम घोड़ी चढ़ेगा और DJ भी बजेगा, जुलूस तो निकलना तय है।

कोई रोक सके बहुजन शेर को इतनी तो कुत्तों में ताकत नहीं।

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