November 14, 2020

शिव के ‘राज’ में 108 एम्बुलेंस के इंतजार में तड़पती रही प्रसूता, चौपाल पर ही हो गया प्रसव

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आगर-मालवा। प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लाख बड़े-बड़े दावे करती आई है और लगातार करते रहती है लेकिन आज जो घटना हम आपको बताएंगे उससे यह साफ हो जाएगा कि हमारे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवा कितनी बदहाल है. जैसा कि आप जानते हैं प्रसूता महिलाओं को गांव-गांव से लाने ले जाने के लिए शासन द्वारा बकायदा जननी एक्सप्रेस तथा 108 एंबुलेंस की सुविधा दे रखी है लेकिन धरातल पर कर्ताधर्ताओं की उदासीनता के चलते समय पर प्रसुताओं को इस योजना का लाभ नहीं मिल पाता है.

शुक्रवार को एंबुलेंस पहुंचने में हुई देरी की वजह से एक प्रसूता की जान पर बन आई थी. गनीमत रही कि ग्रामीण महिलाओं ने अपने गांव के चौपाल पर ही सुरक्षित प्रसव करा दिया. प्रसव उपरांत करीब डेढ़ घंटे बाद एंबुलेंस महिला तक पहुंची और उसे जिला अस्पताल लेकर आई.

जिला मुख्यालय से महज 8 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम कुंडला खेड़ा के मजरे में रहने वाली शारदा बाई पति विक्रम बंजारा को प्रसव पीड़ा होने लगी तभी परिजन महिला को लेकर कुंडला खेड़ा तक आए. वहां शाम 4:00 बजे जननी एक्सप्रेस एवं 108 को सूचना दी गई लेकिन करीब 5:30 बजे तक एंबुलेंस जिला मुख्यालय से केवल 8 किलोमीटर दूर गांव तक नहीं पहुंच पाई. शाम 5:30 बजे महिला की स्थिति बिगड़ने लगी तो आनन-फानन में गांव की महिलाओं ने चौपाल पर ही पलंग की आड़ कर महिला का त्वरित सुरक्षित प्रसव करवा दिया और महिला ने एक बालिका को जन्म दिया है. प्रसव के करीब आधे घंटे बाद एंबुलेंस गांव पहुंची जहां जच्चा-बच्चा को जिला अस्पताल लाया गया. परिजनों ने मामले पर काफी आक्रोश भी व्यक्त किया है. अब आप इस घटना से अंदाजा लगा ही सकते हैं कि हमारे प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय के बड़े-बड़े दावे कहां तक ही टिक पाते हैं.

यह मामला पहली दफा नहीं है इससे पहले भी कई बार इस तरह की घटनाएं सामने आती है जब महिलाओं को यहां तो घर पर या फिर किसी लोडिंग वाहन में ही प्रसव हो जाता है लेकिन इस और जिला चिकित्सालय के जिम्मेदारों का कोई ध्यान नहीं है.

हमारे प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था शिवराज सिंह चौहान की तरह धीमी गति की हो चुकी है. जैसा कि आज ग्राम कुंडला खेड़ा में एक बहन की डिलीवरी उसके घर पर ही हो गई कारण यह रहा कि 108 को 4:00 बजे से फोन लगाते रहे वह तरसती रही. एंबुलेंस का इंतजार करते करते ही डिलीवरी गांव के लोगों ने करवाई यह गंभीर मुद्दा है. 108 एम्बुलेंस की व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और स्वास्थ्य व्यवस्था की बात करें तो हमारे प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था भी बुरी स्थिति में है और इस और स्वास्थ्य मंत्री का कोई ध्यान नहीं है. कई बहने और मासूम बच्चे इन एंबुलेंस के कारण बहुत परेशान होते हैं.

अंकुश भटनागर(राष्ट्रीय सचिव, NSUI)
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