November 10, 2020

22 साल पहले 1998 में आखिरी बना था कांग्रेस का विधायक, अब 1998 वोटों से कांग्रेस ने जीता आगर विधानसभा उपचुनाव

आगर-मालवा। मध्य प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों के साथी ही आगर विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव हुआ था और उपचुनाव के नतीजे आज आप सबके सामने हैं। मध्यप्रदेश में भले ही कांग्रेस अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं दिखा पाई हो लेकिन कांग्रेस ने आगर विधानसभा पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिखाया है और भाजपा के गढ़ को अपने खेमे में कर लिया है। आगर विधानसभा पर जब से मतगणना शुरू हुई थी तब से ही कशमकश की स्थिति बनी हुई थी लेकिन अंत में कांग्रेस के विपिन वानखेड़े ने भाजपा के मनोज ऊंटवाल को 1998 वोटों से शिकस्त दे दी।

मुख्यमंत्री शिवराज नही बचा पाए अपनी लाज

आगर विधानसभा पर जब प्रत्याशी की घोषणा होनी थी तब संगठन के कई लोग अन्य लोगों को आगर विधानसभा से टिकट देने की मांग कर रहे थे लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार पूर्व विधायक स्वर्गीय मनोहर ऊंटवाल के पुत्र मनोज ऊंटवाल को आगर विधानसभा से उम्मीदवार बनाने की जिद पर अड़े हुए थे और उन्होंने आचार संहिता लगने के बाद 5 बार मनोज ऊंटवाल के समर्थन में चुनावी सभाएं की थी लेकिन कहीं ना कहीं आप यह कह सकते हैं कि इस सीट पर शिवराज सिंह चौहान की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई थी लेकिन मनोज ऊंटवाल की हार के साथ ही आप यह मान सकते है कि आगर विधानसभा सीट पर शिवराज सिंह चौहान अपनी लाज नहीं बचा पाए।

मतदाताओं ने “एलके आदमी देखा”

कांग्रेस प्रत्याशी विपिन वानखेड़े ने इस बार अनोखे अंदाज में चुनाव लड़ा। उन्होंने चुनाव में उपयोग किए जाने वाले नारों को आगर क्षेत्र की प्रसिद्ध मालवी भाषा में लिखा और लोगों से इस बार पार्टी ना देखते हुए व्यक्ति को देखा ओर कहि ना कहि कांग्रेस ने दिखावी रूप से चुनाव ना लड़ते हुए अंदरूनी तरीके से चुनाव लड़ा।

2018 विधानसभा चुनाव हार गए थे विपिन

कांग्रेस ने विपिन वानखेड़े को वर्ष 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में भी अपना प्रत्याशी बनाया था लेकिन विपिन वानखेड़े भाजपा के प्रत्याशी मनोहर ऊंटवाल के सामने नहीं जीत पाए थे और उन्हें मात्र 2490 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। हार का अंतर काफी कम होने के चलते और उनकी सक्रियता को देखते हुए पार्टी ने उन्हें आगर विधानसभा से फिर चुनाव लड़ाया ओर आखिरकार विपिन वानखेड़े पार्टी के भरोसे पर खरे उतरे।

विपिन ने छीना भाजपा का गढ़

जब भी मध्यप्रदेश में आगर विधानसभा की बात होती है तो भाजपा इस सीट को लेकर काफी संतुष्ट दिखाई देती है क्योंकि जब से मध्यप्रदेश विधानसभा का गठन हुआ है उसके बाद से यहां सिर्फ तीन बार ही कांग्रेस ने अपना परचम लहराया है बाकी हर विधानसभा चुनाव में आगर से भाजपा प्रचंड बहुमतों से जीतती आई है और इसे भाजपा अपने लिए सबसे सुरक्षित सीट मानती है लेकिन इस बार विपिन वानखेड़े ने भाजपा का गढ़ कहि जाने वाली आगर विधानसभा पर 22 साल बाद चुनाव जीतकर एक इतिहास कायम किया है।

1998 के बाद 2020 में जीती कांग्रेस

आगर विधानसभा पर वर्ष 1998 में कांग्रेस के रामलाल मालवीय विजय हुए थे, उसके बाद आगर विधानसभा पर लगातार पांच बार भाजपा के विधायकों ने राज किया ओर अब 22 साल बाद दोबारा कांग्रेस ने आगर विधानसभा पर वापसी की है तो हम ऐसा कह सकते है कि 22 साल पहले वर्ष 1998 में बना था कांग्रेस का विधायक और अब वर्ष 2020 में कांग्रेस ने अब 1998 वोटों से वापसी की है।

सर्वप्रथम मैं बाबा बैजनाथ को धन्यवाद देता हूं, उन्हें की नगरी में हमने चुनाव लड़ा और उन्हीं के आशीर्वाद से चुनाव जीता है और सरकार भले ही कांग्रेस की ना बनी हो लेकिन अगर विधानसभा क्षेत्र के हित में लगातार विकास कार्य किए जाएंगे।

(विपिन वानखेड़े, विधायक आगर)

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