आपदा में अवसर! छिंदवाड़ा के निजी अस्पतालों में सरकारी आदेशों की उड़ रही धज्जियां, मरीजों से इलाज के नाम वसूल रहे भारी रकम

●मनमाने शुल्क पर हो रहा इलाज, प्रशासन खामोश

●सोशल मीडिया के माध्यम से लगे बड़े आरोप

छिंदवाड़ा। जिले में इस समय कोरोना महामारी के कारण परिस्तिथि बिल्कुल विपरीत हो रही है. नागरिक इस दौरान या तो भय से जूझ रहे है या तो फिर कोरोना से. जिले का शासकीय अस्पताल लगभग भर चुका है, जिससे निजी अस्पतालों में जाना स्थानीय लोगों के लिए जाना मजबूरी बन गया है और निजी अस्पताल के लिए शासन द्वारा पहले ही प्रत्येक सुविधा का शुल्क तय किया गया है. इसी बीच बुधवार को सोशल मीडिया से उठी एक खबर ने तूल पकड़ लिया. सोशल मीडिया पर लगे इस गंभीर आरोप से जिले के सारे निजी अस्पताल भयभीत हो गए.

जिले के कोयलांचल के एक युवा नितिन मोहन डेहरिया जो कि इंदौर में छात्र नेता है. इनसे किसी ने सम्पर्क कर निजी अस्पताल द्वारा मनमाने तरीके से शुल्क वसूलने और बुरा व्यवहार करने की बात कही. जिसको नितिन ने अपने ट्विटर हैंडल से मुख्यमंत्री, जिले के कलेक्टर सहित कई मीडिया जगत के कई समूहों तक ट्वीट के माध्यम से पहुचाई. इस आरोप के बाद से जिले के निजी अस्पताल भयभीत से हो गए.

आरोप में कहा गया कि जिला केंद्र के कई निजी अस्पताल इस विषम हालात में मौके का फायदा उठा कर 25 से 30 हज़ार प्रति दिन का शुल्क वसूल रहे है. जिसका कोई भी पुख्ता लिखित ब्यौरा या बिल लोगो को नही दिया जा रहा, सिर्फ एक आम पेपर में लिखकर जमाराशि लिखकर दे रहे है. इस राशि मे भी सिर्फ आम सुविधा है, ना वेंटिलेटर है और ना ही कोई विशेष सुविधा, जो कि पूर्णतः गलत है.

इसी के अगले ट्वीट में नितिन का कहना है कि अगर इस विषय मे लगातार छापे लगाए जाएं तो ऐसे कई निजी अस्पतालों की सच्चाई सबके सामने आ जायेगी. इस ट्वीट के बाद से युवाओं व जनप्रतिनिधियों ने इस मामले में कार्यवाही की मांग करनी शुरू कर दी है .

बता दे कि ऐसे हालात में इन निजी अस्पतालों के चिकित्सीय लाइसेंस रद्द भी हो सकता है, साथ ही उक्त डॉक्टर पर कानूनी कार्यवाही की जा सकती है. महामारी कानून के अंतर्गत अनेको प्रावधानों का उलंघन इस दौरान जिले में हो रहा है, जिसके बाद प्रशासन भी मूक दर्शक बना हुआ है जो कि सन्देह को जन्म देता है की जिला केंद्र में इस तरीके से खुली लूट होना एक बड़ी लापरवाही है, जो सांठगांठ को खुले तौर पर दिख रहा है.

सोशल मीडिया पर मामला उठा, इतने हंगामे के बाद भी प्रशासन खामोश, ये कैसे सम्भव हो सकता है?

यह विषय मुझे मेरे सोशल मीडिया के माध्यम से सम्पर्क के एक व्यक्ति ने दिया और सहायता की गुहार लगाई. मैने तत्काल इस विषय को अपने ट्विटर से ज़िम्मेदार अधिकारियों तक पहुचाया जिसमे तत्काल कार्यवाही की उम्मीद है जो कि इस समय आवश्यक है.

नितिन मोहन डेहरिया

पत्रकारिता शोधार्थी , छात्र नेता व लेखक