एक्स-रे में दिखा गले में फंसा सिक्का: आगर के माँ पीतांबरा हॉस्पिटल में आधुनिक एंडोस्कोपिक तकनीक से सफल ऑपरेशन के बाद स्वस्थ हुआ चार वर्षीय नीतेश

एक्स-रे में दिखा गले में फंसा सिक्का: आगर के माँ पीतांबरा हॉस्पिटल में आधुनिक एंडोस्कोपिक तकनीक से सफल ऑपरेशन के बाद स्वस्थ हुआ चार वर्षीय नीतेश

आगर-मालवा। डॉक्टरों की तत्परता और आधुनिक चिकित्सा तकनीक की बदौलत चार वर्षीय मासूम की जान बच गई। आगर-मालवा जिले के सुसनेर निवासी चार साल के नीतेश ने स्कूल में खेलते समय गलती से 5 रुपये का सिक्का निगल लिया। सिक्का गले में फंसने से बच्चे को घबराहट, उल्टियां और सांस लेने में परेशानी होने लगी। परिजन उसे तत्काल सुसनेर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद आगर स्थित माँ पीतांबरा हॉस्पिटल रेफर किया गया।

जानकारी के अनुसार, घटना 1 जुलाई को सुबह करीब 11 बजे की है। अस्पताल पहुंचने पर ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक पाटीदार ने बच्चे की जांच कर एक्स-रे कराया। जांच में स्पष्ट हुआ कि 5 रुपये का सिक्का गले में फंसा हुआ है। स्थिति गंभीर होने के कारण बिना समय गंवाए ऑपरेशन का निर्णय लिया गया।

डॉ. अभिषेक पाटीदार ने आधुनिक एंडोस्कोपिक (दूरबीन) तकनीक की सहायता से बिना किसी चीरे के सफलतापूर्वक सिक्का बाहर निकाल दिया। पूरी प्रक्रिया सुरक्षित ढंग से संपन्न हुई और बच्चे की जान बच गई। उपचार के बाद बच्चे की हालत सामान्य होने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। सफल ऑपरेशन के बाद परिजनों ने चिकित्सकों का आभार जताया।

डॉक्टर्स डे के अवसर पर यह सफल उपचार चिकित्सकों की कुशलता, त्वरित निर्णय क्षमता और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया।समय पर इलाज से टल सकता है बड़ा हादसाडॉ. अभिषेक पाटीदार ने बताया कि यदि कोई बच्चा सिक्का, बैटरी या अन्य छोटी वस्तु निगल ले और उसे सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी, उल्टी या बेचैनी महसूस हो, तो घरेलू उपाय करने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए। समय पर इलाज मिलने से गंभीर जटिलताओं और बड़े हादसों से बचा जा सकता है।

बच्चों की सुरक्षा के लिए रखें ये सावधानियां

• बच्चों को सिक्के, बटन बैटरी व अन्य छोटी वस्तुओं से दूर रखें।

•छोटे बच्चों को बिना निगरानी के अकेला न छोड़ें।

•उनकी उम्र के अनुसार सुरक्षित खिलौनों का ही उपयोग कराएं।

• छोटी एवं नुकीली वस्तुएं बच्चों की पहुंच से दूर रखें।

•सांस लेने में परेशानी, लगातार खांसी या बेचैनी होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।

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