November 9, 2020

किसके सर सजेगा आगर विधानसभा का ताज?

आगर-मालवा। मध्यप्रदेश की 28 विधानसभा सीटों के साथ ही आगर विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव हुआ है. यह उपचुनाव किसी दलबदलू नेता के कारण नहीं हुआ बल्कि यहां पर उपचुनाव वास्तविक संवैधानिक कारणों की वजह से हुआ है. आगर विधानसभा से तत्कालीन भाजपा विधायक स्वर्गीय मनोहर ऊंटवाल के निधन के बाद यह सीट रिक्त हुई थी, जिसके बाद अब यहां उपचुनाव करवाया गया है.

उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने पूरे दमखम के साथ मोर्चा संभाल रखा था लेकिन अब कहीं ना कहीं इन दोनों पार्टियों ने जो परीक्षा दी है उसके परिणाम आने का समय हो गया है और कल 10 नवंबर को आगर विधानसभा का सरताज कौन बनेगा इस बात का फैसला हो जाएगा. भाजपा ने आगर विधानसभा से स्वर्गीय मनोहर ऊंटवाल के पुत्र मनोज ऊंटवाल को मैदान में उतारा था तो वहीं कांग्रेस ने एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष विपिन वानखेड़े पर अपना दांव लगाया था. दोनों ही उम्मीदवार युवा है और दोनों ही शिक्षित और संघर्षशील है लेकिन इस बार का यह उपचुनाव कहीं ना कहीं भाजपा के लिए नुकसानदायक साबित होता हुआ दिखाई दे रहा है.

अब चुनाव खत्म हो चुका है और मतगणना की सिर्फ 1 रात शेष बची है, ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों द्वारा लगातार कयास लगाए जा रहे हैं ओर खबरे आ रही है कि आगर विधानसभा इस बार कांग्रेस के खाते में जाती हुई नजर आ रही है.

मतदाताओं ने “एलके आदमी देखा”

कांग्रेस प्रत्याशी विपिन वानखेड़े नहीं इस बार अनोखे अंदाज में चुनाव लड़ा. उन्होंने चुनाव में उपयोग किए जाने वाले नारों को आगर क्षेत्र की प्रसिद्ध मालवी भाषा में लिखा और लोगों से इस बार पार्टी ना देखते हुए व्यक्ति को देखने की बात कही और ग्रामीण क्षेत्रों में जब सिंघम टाइम्स ने सर्वे किया तो लोगों ने कहा कि इस बार उन्होंने कांग्रेस को नहीं देखा उन्होंने विपिन को देखा है, तो इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कहीं ना कहीं उनके इस नारे का लोगों पर सकारात्मक असर हुआ है.

भाजपा का गढ़ है आगर

जब भी मध्यप्रदेश में आगर विधानसभा की बात होती है तो भाजपा इस सीट को लेकर काफी संतुष्ट दिखाई देती है क्योंकि जब से मध्यप्रदेश विधानसभा का गठन हुआ है उसके बाद से यहां सिर्फ तीन बार ही कांग्रेस ने अपना परचम लहराया है बाकी हर विधानसभा चुनाव में आगर से भाजपा प्रचंड बहुमतों से जीतती आई है और इसे भाजपा अपने लिए सबसे सुरक्षित सीट मानती है.

2018 विधानसभा चुनाव हार गए थे विपिन

कांग्रेस ने विपिन वानखेड़े को वर्ष 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में भी अपना प्रत्याशी बनाया था लेकिन विपिन वानखेड़े भाजपा के प्रत्याशी मनोहर ऊंटवाल के सामने नहीं जीत पाए थे और उन्हें मात्र 2490 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था. हार का अंतर काफी कम होने के चलते और उनकी सक्रियता को देखते हुए पार्टी ने हाल ही में हुए उपचुनाव में उन्हें फिर से अपना उम्मीदवार बनाया था और कहीं ना कहीं वह पार्टी के इस निर्णय पर खरे उतरते हुए नजर आ रहे हैं.

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