November 22, 2020

आगर के गो-अभयारण्य पहुंचे शिवराज, यहां करेंगे 3 घोषणाएं, गायों को लेकर बनेगा रिसर्च सेंटर

मध्यप्रदेश की गो-कैबिनेट की पहली बैठक रविवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में हुई. बैठक में फैसला लिया गया कि आगर में गायों को लेकर रिसर्च सेंटर बनेगा. इस बीच, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आगर के सालरिया स्थित गो-अभयारण्य पहुंच चुके हैं. यहां वे एक सभा को संबोधित करेंगे और 3 बड़ी घोषणाएं करेंगे.

गो-कैबिनेट से जुड़ी 4 प्रमुख बातें:

●प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गोधन का इस्तेमाल किया जाएगा.

● स्वाबलंबन के लिए गोमाता की अवधारणा को लागू करेंगे.

●गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा. गायों के गोबर और गोमूत्र का बेहतर उपयोग कैसेे करें, अधिकारी इस पर सुझाव लें और काम शुरू करें.

●प्रदेश और देश में कई गोशालाएं, संस्थाएं इस दिशा में बेहतर काम कर रही हैं.

●मुख्यमंत्री ने स्वसहायता समूहों को गोशालाओं का संचालन करने की सहमति दी.

●प्रदेश में बड़ी संख्या में गोशालाएं बनाई जाएंगी और इसमें समाज का सहयोग लिया जाएगा. सिर्फ पशुपालन विभाग नहीं, बल्कि अन्य विभाग भी इस भूमिका को निभाएं.

मुख्यमंत्री आगर में विशेषज्ञाें से करेंगे मुलाकात
केंद्र सरकार के गोपाल रत्न पुरस्कार से सम्मानित एवं ब्राजील के गिर नस्ल के संवर्धन के लिए आधिकारिक सलाहकार गोंडल गुजरात के भुनेश्वरी विद्यापीठ के घनश्याम दास महाराज, अक्षयपात्र संस्थान के हिंगोनिया गोशाला के संचालक राधाप्रिय दास, कृष्णायन संस्था हरिद्वार के स्वामी ऋषभ आनंद, श्योपुर के बाल आंग्रे, बंसी गिर गोशाला अहमदाबाद के गोपाल भाई सुतारिया, गिर गोजतन संस्थान राजकोट के रमेश भाई रूपारेलिया, बंसी गोधाम काशीपुर उत्तराखंड के नीरज चौधरी,त्रिकुटा आयुर्वेद रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड के डॉ. आरसी दीक्षित, भारत भारती गोशाला बैतूल के मोहन नागर से चर्चा करेंगे।

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कितना सेस लगेगा, गौ-कैबिनेट में होगा विचार

मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि गायों को पालने के लिए सेस लगाने पर गौ-कैबिनेट की बैठक में विचार होगा. हालांकि अधिकारियों ने वाहनों की बिक्री, राजिस्ट्री और शराब पर सेस लगाने के विकल्प तैयार किए हैं.

इस समय प्रदेश में लगभग 1300 गोशालाएं हैं जिनमें 1.80 लाख गायों को रखा गया है. बताया जाता है कि पिछली कमलनाथ सरकार ने बजट में प्रति गाय 20 रुपए का आवंटन किया था. पिछले वित्तीय वर्ष में पशुपालन विभाग का बजट 132 करोड़ रुपए रखा था जबकि 2020-21 में तो यह सीधे 11 करोड़ रुपये हो गया, यानी लगभग 90 फीसदी की कटौती कर दी गई. यानी प्रति गाय सरकारी खुराक 20 रुपए से घटकर 1 रुपए 60 पैसे हो गई.

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